
दूसरा दिन: ब्रह्मचारिणी माता
नवरात्रि के दूसरे दिन देवी दुर्गा के "उमा" या "ब्रह्मचारिणी" रूप की पूजा की जाती है। देवी का यह रूप परम सत्य जानने के लिए तप या गहरी तपस्या को दर्शाता है।
एक पौराणिक आख्यान के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी, जिन्हें मां भगवती भी कहा जाता है, उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए एक हजार वर्षों तक फलों का सेवन कर तपस्या की थी। इसके पश्चात तीन हजार वर्षों तक पेड़ों की पत्तियां खाकर तपस्या की। इतनी कठोर तपस्या के बाद इन्हें ब्रह्मचारिणी स्वरूप प्राप्त हुआ।
ऐसी मान्यता है कि जो भी साधक या भक्त मां भगवती का व्रत करता है वह कभी भी अपने जीवन में नहीं भटकता।
यदि आप भी नवरात्रि के द्वितीय दिन पर मां ब्रह्मचारिणी की उपासना करने जा रहे हैं तो पूजा के साथ निम्नलिखित मंत्र का जाप अवश्य करें:
या देवी सर्वभूतेषु मां बह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
अर्थ - हे मां। सर्वत्र विराजमान और ब्रह्मचारिणी के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है।

No comments:
Post a Comment